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कब हरि मिलिहें हो राम !

31 October 2023

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गाँव के नाँव सुनते माई मन परि जाले आ माई के मन परते मन रोआइन पराइन हो जाला। गाँव के सपना माइए पर टिकल रहे। ओकरा मुअते नेह नाता मउरा गइल। ई. साँच बात बा, गाँव के माटी आ हवा पानी से बनल मन में गाँवे समाइल रहेला। घर- आँगन, अड़ोस-पड़ोस, दुआर बथान, खेत खरिहान, मठिया बगइचा, परती-पराँत, फेंड़- खूँट, परब-तेवहार, संगी-साथी, आपन गोला बैल, पुरनिया लोगन के संगे हरदम हँसत रहेवाली छोह के नदी जब तब बेसुध कइ देले आ शहर से पगहा तुरा के गाँवे भागि जाए खातिर मन पगला जाला।

नदी के दाँती पर हमार माटी के घर रहे, जवन गाँव भर में सबले सुन्नर लागत रहे लइकाई में लमहर आँगन रहे, जवना के दखिन ओरि बड़का बाबा के परिवार रहे आ उत्तर ओरि हमनी के हिस्सा रहे। कोनसिया घर में कोठिला में से माई जब अनाज निकाले जाई त जरत ढिबरी हाथ में लेके अनपुरना के घर में दिनों में अन्हरिया छवले रहत रहे। माई के भुअरकी बिलार के बड़ा डर लागत रहे। एक बेरि बिलार के चमकत आँखि देखते हाथ के दीआ फेंकि के माई चिचिआत अँगना में भागि आइल रहे। आगि लागे से बाँचल । बिलारि देखते हमरो मन मरुआ जाला। बाकिर माई त अतना सुकवार रहे जे तनकिए में छितरा जात रहे। माई लेखा गोर मेहरारू ढेर लउकली स, बाकिर ओइसन सुन्नर मेहरारू आज ले ना लउकल । जब-जब सुत्रर मेहरारू लउकेले माई मन परि जाले। माई के बाबा छकउड़ी पांडे रामायण के बाड़ा भारी जानकार के रूप में जवार में इज्जत कमइले रहले। उन्हुके से सुनिसुनि के माइ के 'रामचरितमानस' के दुनिया भरि के चौपाई इयाद रहे। चाउर दालि बीनत, तरकारी छेंवकत माई चौपाई गावत रहत रहे। जाड़ा के पहाड़ नीयर राति । भोरे उठे के रपटा रजाई में हमनी भाई बहिन के लुकवले माई पराती आ रामायन के चौपाई अतना मीठ राग में गावे जे अँजोर हो जाइ। घाम लोहे हमनी के अँगना से बहरी निकलि आईं जा । बाकिर माई लयनू नियर मोलायमे ना रहे, अपना लइकन के रहनि के परहेदारी में केहू से बढ़ि के कठकरेजी रहे।

हरदम एकही राग फेटत रहति रहे, 'रहनि ठीक रहला पर अन्हरिओ में राह लड़कि जाला रहनि बिगड़ल कि कुल्ही अछइत जिनिगी के सवाद माटी में मिलि जाला। 'मदरसा जाए के नाम से हमरा बोखार लागि जात रहे। बाकिर मरछहा बेटा के आदमी बनावे के चिन्ता से माई मोह छोह के लात मारि के स्कूले भेजे। गणित हमरा बुझइबे ना करे, पढ़े में मन कइसे लागो रोड़-गाई के चउथा दर्जा पास भइनी त माई चाचा किंहा गोरखपुर पढ़े खातिर भेजे के फेर में परि गइल। मन परडता रडती स्टेशन पर रोअत रोअत चाचा संगे रेल पर चढ़ल रहनी उहवा पढ़ाई करे गइल रहनी, बाकिर माई आ गाँव के सुधि में सीझत समय काटी। छुट्टी में गाँवे आवत खा भाखरि के रेलपुल से सिरी छपरा के सोझा आपना सरेह में खाड़ पाकड़ के फेंड़ जब लड़के, बुझाइ जे गाँव पहुँच गइनी आ आ खड़ा हो जाए।

हमार गाँव बलिहार गंगा के नियरे बा बाढ़ि के जनमते चीन्हि लेले रहनी । बरसात आवते मन बाढ़ि के जोहे लागे। बाढ़ि अइला के दूगो बड़हन सुख भेंटाइ स्कूल बन्द हो जाए आ दुआरिए पर पँवरे नहाए के सुख मिलि जाए। जब पँवरे के लूरि ना रहे, एक चेरि घर के सोझे चह से गिरि के डूबि गइल रहनी चाचा नदी में कूदि के बँचवले । बाढ़ि आवते हरिना, सियार, नेऊर, साँप से गाँव भरि जात रहे। बाढ़ि के ओहरला पर इफ्लुजा आ हैजा शुरू होखे। अपना गाँव के ओह घरी के देखल गरीबी के चेहरा, जब-तब आजुओ मन परि जाला, मन मेहरा जाला लाटा, गाटा, अनरसा, आम, जामुन, अमरूद, गूलरि, सिरिफल, बइरि हमरा गाँव के मावा 1 -मिठाई रहे। मेला ओला में जिलेबी, टिकरी आ मोतीचूर के मिठाई लड़के एक बेरि हम बहुत बेमार परि गइल रहनी माई भइया (चाचा) के बड़ बेटा) के बलिया फल कीने भेजले रहे। तीसरा दिने भइया छपरा से खोजि - खाजि के तीनि गो सूखल नौरंगी लेके लवटल रहले। आजु त गाँव से सटले रामगढ़ ढाला (बस अड्डा) पर अँगूर के महुआ लेखा पथारि परल रहता । मजूरन के बूँट आ महुआ के घुघुनी के संगे गूर के रस पनिपिआव करे के दियात रहे।

बाबा के जमीन में बसल रामएकबाल चमार के बूढ़ महतारी घरे-घरे मानर पूजे आ नार काटे बोलावल जासु सरि रोग के घर रहे मनराखन बो के लुग्गा लत्ता बसात रहत रहे। लरकोरी के साँसति मन परेला त आजुओं रॉवा गनगना जाला सोहर राग उठे बाकिर मुँहदेखी के पहिलहीं ढेर लइका मुँइ जास। ककिया के आखिरवाली एकई लइकी बेचली, जवना के जनम गोरखपुर में ईसाई नर्स करवले रहे। हमरा सबसे छोटकी बहिनी के समउरिया ककिया के बेटा के जब टिटनस हो गइल त रोग दूर करे खातिर खोज- खाजि के दूगो बतक ले आइल गइल रहे, मन परता अउरियो गँवई टोटरम भइल रहे। बाकिर टिटनस सबसे बरियार परल। ककिया के बेटा के केहू बचा ना सकल जब भूत आ चुरइल घरे त सुबहान मियाँ ढारे खातिर बोलावल जासु साँप बिच्छी झारेवाला खास लोग रहे। डाइन भूत के डरे पच्छिम के बारी में जाए के मनाही रहे। रामपुर के मठिआ के सोझा नदी के दाँती पर बाबाघर आ राजाघर के बड़हन बगइचा रहे। उहे पच्छिम के बारी कहाए । पच्छिम के बारी में कबुरगाह रहे। दसमी में एही बारी में गाँव के डाइनि आपन मंतर जगावs स, अइसन विसवास रहे एह से ओने जाए के हमनी के मनाही रहे।

रामएकबाल चमार के घर के लइका मेहरारू खरिहान से देवरी कइल बैलन के गोबर बटोरिके ले जासु। ओह गोवर पर ओही लोग के हक रहे। गोबर के अनाज ओह लोगन के बड़का सहारा रहे। खरिहान में नाज तैयार होते बदरीनारायन के पंडा आपन झोरा- झंडा ले ले गाँव में दुकसु । खरिहाने खरिहाने घूमि के गंगोतरी जमनोतरी के जल के छोटी- छोटी सोसी बाँटि के दछिना के अनाज से आपन बोरा भरि लेसु गाँव भरि के दछिना बटोराइ जाए त गाँव के बनिया से महाजनी बुद्धि से भाव-ताव कइके कुल्ही आनाज वेंचि देसु आ रोपया गठिया के पहाड़ के राह धरसु अइसने चतुर चल्हाक लोगन के पूजा घरम के एगो गँवई रूप रहे सभे भगवान आ घरम के नाम पर किरिया खाए, बाकिर जइसे आजु के नेता प्रेता लोग संविधान के नाम पर शपथ लेके कुकरम करे खातिर आजाद हो जाला ओइसहीं धरम आ किरिया के माने कुछुए लोग के बुझाए आ ओकरे रहनि, बात- बेहवार में धरम लडके। बाकिर हल्ला बड़ा रहे ओह घरी धरम के कुछुए अइसन दुआर रहे जहाँ नाठा गाइ आ बूढ़ बैल के नाद पर दाना भूसा मिले। खाली गोठार देबेवाला माल- गोरू के धरम के ढोल पीटेवाला लोग पगहा खोलि के परती पराँत आ खेत-वधारि में चरि चबार के जिए खातिर खेदि देत रहे। ओह अनेरिआ माल के गाँव के लोग लउरिन्हि मारि के सउसे देहि घाही कइ देउ । आजु बाप-महतारी के हाल अनेरिआ माल गोरू लेखा हो गइल बा, शहरे में ना, गाँवों में ई बेमारी गँवे-गवे दुके लागल बिआ। समय के चाल बड़ा तेज हो गइल बा । बूढ़ पुरनिया सकाइल रहता जे ई बड़ेरा कुल्हि दाना भूसा उड़ाइ मति ले जाऊ

बहुत ऊँचे रहे मठिआ के भरीति । बदरीदास आ उन्हकर सेवक जंगलीदास के लइकन से कोका निअर डर लागे। मठिया के गाँछ के छुअत देखि लेहला पर बदरीदास टाँगी लेके दउरावसु सेयान भइला पर मालूम भइल जे बदरीदास में दुर्वासा के क्रोधे ना रहे, लंगोटो के काँच रहले। उन्हकर चेला जंगलीदास पोखता चरित्र के साधू रहले, बाकिर उन्हुकर भारी सरीर आ भकसावन मुँह, भूत-प्रेत के बाप आजा लागे उन्हका के देखते प्रान सूखि जाइ । कबो - कबो हमरा दुआरी पर सीधा खातिर जब उन्हकर ऊँच बोली सुनाई परे, प्रान धक्- धक् करे लागे। माई केहू के हाथे सीधा दालि भेजवाइ देइ। उन्हुका गइला के बाद जान में जान आवे मठिया के तुलाराम परभंस के सिद्धि के कथा पुरनिया लोग के मुँहे सुनले रहनी । मठिया के अलावे गाँव में कइगो अउरी देव स्थान रहे, जहाँ दिअरी के दिने बड़का बाबा के संगे हमनी के दीआ जरावे जाई जा घरभरन चौबे के घर के दखिन परती में दिआ जरावत खा बड़का बाबा बतवले रहले जे ई अनजान बाबा हवे घरभरन चौबे के घर के उत्तर- पूरब

के कोना पर बड़ा भारी वर के फेंड रहे। ओकरा नीचे लगना सत्ती के चउरा रहे। बाबा पट्टी

के दखिन गड़हा के दाँती पर नरियारे बाबा के चउरा रहे। कनिया के असवारी जब पहिली

बेरि गाँवमें दुके त छनभरि खातिर नरियारे बाबा किहाँ असवारी राखे के रेवाज रहे। बतकही

के प्रसंग में मन्त्रन भइया (स्व. कथाकार केशव प्रसाद मिश्र) हमारा के सेयान भइला पर

नरियारे बाबा के इतिहास बतवले रहले नरियारे जाति के दुसाध रहले हरवाह रहले। खेत

बोअत खा बिआ कम पड़ि गइल। मलिकार के हुकुम से धउरल बिया ले आवे घरे गइले ।

विआ के दउरा मलिकाइन उन्हुका कपार पर उठा देहली। उनुका माँग के सेनुर नरियारे के

कान्ह कहाँ लागि गइल । बिआ के भरल दउरा लेके दुलुकी पर बधारी पहुँचले त उन्हुका

मालिक के सेनुर के दगिए सब से पहिले लउकल देखते बउरा गइले । हरवाह नरियारे

डकरत चिचिआत जान बचावे खातिर एने ओने भागत छटकत हारि गइल। मनसा पाप से

बउराइल लउरी से मारि-मारि के डॅकरत-कराहत हरवाह के मुआ दिहले हतिया के पाप

बरम्ह बनिके जब तरह-तरह से डाहे लागल त नरियारे बाबा के चउरा बनल आ सेनुर चढ़ाई

के उन्हकर उपद्रो शांत करे के परम्परा शुरू भइल। कनिया के पहिला परनाम उन्हके बखरा

परल। सेयान भइला पर ई कथा मन्नन भइया से सुनि के रोआं गनगना गइल रहे। अइसन

अन्हरिया में डूबल हमार गाँव रहे, जहाँ के मठिया पर तुलाराम परभंस लेखा साधु रहले, आ

सटले गाँव रामगढ़ में भीमराव ओझा लेखा महापण्डित रहले जेकरा के निर्णय सिन्धु मानि

के गया तक से लोग धर्मशास्त्र के अझुरहटि सझुरावे आवत रहे। पड़ोसी गाँव सुघर छपरा में

हरेराम ब्रह्मचारी लेखा महात्मा के जनम भइल रहे, जिन्हिका मुठिए में तीनो काल रहत रहे,

लइकाई में सुनले रहनी आ सेयान भइला पर पं. बलदेव उपाधिया के लेख 'कल्याण' में पढ़ि

के जननीं। हमरा गाँव के देवता अवदान बाबा हवे, जिन्हिकर चठरा गाँव के उत्तर चउरासी

के माथ पर सिरीछपरा में बा। अवदान बाबा के इतिहास अँजोरिया के इतिहास है। गवना के

पिअरी पहिनले गाँव के अनपुरना के कोखि, उपजाऊ चौरासी के लमहर रकबा के रच्छा

करत अपना बहुरिया के त माँग धोइ देहले, बाकिर रक्त के होली खेलि के गाँव के देवता बनि

गइले । अपना बलिदान से वैचावल धरती के माथ पर बइठल अवदान बाबा आजुओ सरेह

के रखवारी में दिन-रात जागत रहेले विपत्ति के बादरि अवदान बाबा के सुमिरते फाटि

जाले, अइसन विसवास हमरा गाँव के लोगन में आजुओ बा अवदान बाबा के अंगना में

लइकाई में हम जाउरि (तसमई) के परसादी खइले बानी । सायद ओकरे प्रभाव ह जे सहजे

भेंटाइल कुराह पर चले के कवो मन ना चलल ।

कातिक में खेती के समहुत के दिने बुझाइ जे आँगन में देवता उतरि आइल बाड़े। बड़का बाबा हाथ में भरल लोटा आ माथ पर गमछी राखि के देवता पितर के सुमिरत अंगना से निकल। संगे संगे कान्ह पर हर लेले हरवाह मनु अहीर आ दुआर के रखवार माल-गोरू के सेवक भुनेसर सिंह। घरो के कुछ लोग समहुत देखे खेत ले जाए खातिर संगे लागि जाउ । समहुत के अनुष्ठान पूरा कइके बड़का बाबा खेत के माथ पर खाड़ होके ऊँच राग में अनपुरना के स्वामी के गोहरावसु, 'हरिअर- हरिअर महादेव हरिअर, चारु कोने चारि मन बिगहा पचास मन' समहुत के दिने कढ़ी बरी, फुलौरा भात बने बैल आ गाइ के देवता लेखा पूजिके कढ़ी-भात बड़का बाबा अपना हाथे खियावसु। समहुते लेखा कातिक के सात्विक परब रहे अछनमी, अँवरा के फेंड़ के नीचे गाइ के गोबर से लिपि-पोति के नया चूल्हा पर रकम रकम के गँवई रसोई बने देवता के भोग लागे तब बाभन के भोजन कराइ के घर भरि के लोग अँवरा के छाँह में बइठि के भोजन करे हमरा दुआर के सोझावाला फेड़ घर से दूर परत रहे। बाबा के दुलरुआ नूनू घर के बलेसर मिसिर, जिन्हिका के हमनी का बड़का बाबूजी कहीं जा के घर हमरा घर से सटले रहे। उन्हुका दुआर पर अंवरा के एगो रोअनिया फेंड़ रहे । ओहिजे हमनी के अछनमी के परब मनाई जा । खरिहानि में जब नाज तेयार हो जाय, सीसंकर तेली रासि जोखे बोलावल जासु उहो दिन तेवहारे के दिन लागे। बड़का बाबा अपना हाथे देवता पितर के अंगऊ एक-एक सूप अलगा अलगा राखसु । मठिया आ दोसर दोसर देव स्थान के अंगऊ निकालिके बाबा राखि लेसु तब सीसंकर तरजुई बटखरा लेके रासि में हाथ लगावसु। रामजी के नाँव उचारत रासि जोखसु । ओहू दिने घरे खास रसोई बने का जाने खेती के नाम पर रोजगार करेवाला किसान के रहनि में अब धरम भाव कतना बा! सुने में आवडता जे एने सभे एकही बोल बोलता जे आजु पुरनका रेवाज कामे ना लागी राम जानसु नवकी आन्ही गाँव के कवना अन्हरिया में झोंकी!

लछमिनिया अहिरिन हमरा लइकाई में माता खेले। देवी के कराह आ बकरा चढ़ावल देखले बानी। हमरा लइकाई में नूनू घर के जोअछा के करनी के बड़ा हल्ला रहे। बाप- महतारी के अकेल बेटी, बाप के जगह जमीन लेबे खातिर पटिदारन से ममिला लड़ल रहली। गाँव के बेटी के ढिठई पहिली बेरि देखे में आइल रहे। जिअछा केकयी निअर बदनाम हो गइल रहली। गाँव-घर के कुछ चरित्र हमरा देवता ले बढ़ि के लागे। हमार बड़की ईआ कुकुर-बिलारि के बच्चा भइला पर लरकोरी पतोहि बेटी निअर सेवा करसु। नूनू घर के बिसवामितर मिसिर के जब बड़की माता निकलल रहली त सँउसे देहिए सरि गइल रहे। उन्हुकर सेवा करत ईआ बहुत कम उमिरि में माता के प्रकोप से मरि गइली । पारस चठबे आ माठा चउबे भागवंत भाव के रूप रहे लोग। हमार नतुहा बाभन घोर अभावो में परम हरखित। दोसरा के मंगल आ बढ़ती देखि के अगरा जाए वाला। केहू के समस्या के कान्ह लगावे खातिर बराबर तैयार एही लोग के पट्टीदार पुरनिया रहले बुधन बाबा बड़ा तेज पानी के आदमी रहले । अतना तेज पानी के अदमी जे उन्हुका सामने गाँव के मालिक, हमार बबो के ताप झुक जाए। बुधन बाबा के तेज जब उतान होखे त बड़े-बड़े लोग के चुनौती के भाखा में संबोधित करसु, 'बुधन के चेट में दमड़ी रहेला त बुधन हाथी मोलावे ले।' ई उन्हुकर बोल रहे। माठा, सातू आ तोंत के चटनी बुधन बाबा के मुँहे लागल रहे। गरमी में दिन के भोजन इहे रहे। लमहर उज्जर दाढ़ी आ तामा नियर चमकत देहि । ऋषि के तेज उन्हुका देहि से फूटत रहत रहे। अइसने दमकत देहि रामजनम बाबा के रहे। बुधन बाबा ले लमहर रहले हमरा बाबा के पितिया लागत रहले सबसे नियरा के देयाद एक्के बेटा रहे असमय में मउवत खींच ले गइल। गवनो ना भइल रहे। पुत्र-शोक के घाव से पगला के रामजनम बाबा अपने रोपल बगइचा काटि काटि के उजारि दिहले भोर में नहाइ के घंटन्हि पूजा पर बइठल रहसु । उन्हुकर भतीजा लोकनाथ मिसिर सोगहग धन के वारिस रहले गाँव के लोग उन्दुकर नाव कप्तान साहेब धइले रहे। रहले बड़ा तेज पानी के बाकिर तनी बउड़म रहले। देहल छोड़ि के कुछु जानसु ना । वेले बटोरे वालन के झोरी आगे फइलले रहत रहे। उन्हका बेलुरि के चलते सब धन स्वाहा हो गइल। बड़हन कास्तकार रहले चालीस बीघा से ऊपर जोत के जमीन, भोगेवाला अकेले परिवार के संकट में झोंकि देहले।

• किसिम-किसिम के लोग रहे हमरा गाँव में घूरि से रस्सी बरेवाला, गाभी मारेवाला, अधिया पर ढेला ढोवे वाला आ आन के फिकिरी जान देवे वाला लोगन के ओह घरी कमी ना रहे कुछ अइसनो लोग रहे जेकरा से सँउसे गाँव छनकल रहत रहे आ कुछ अइसन लोग रहे जेकरा के लोग जोहत रहत रहे। ओह लोग के अन्ते गइला पर गाँव सून हो जाइ। बतास के हिलते भूंके वाला आन्हर कुकुरो के कमी ना रहे गाँव में लहरा लगावे वाला मरद मेहरारू से त गाँव भरल रहे हमरा घर के पिछुआरी राजघिर के पगला ठाकुर के बियाह ना भइल रहे। दुनिया जगत से एकदम अलग माल गोरू तक उनकर जिन्दगी सिमटल रहे। लमछर, भारी, पकठाइल, वरिआर काठी, सउँसे देहि में दिनाई। विलास के नाम पर खाली खड़नी से उनकर परिचय रहे। ओह घरी गाँव-जवार में कुँआर रहि जाए वाला ढेर लोग रहे, बाकिर पगला ठाकुर लंगोटा के पोख्ता साधु आदमी रहले डिठार घटिहा एकाधे गो रहले, बाकिर तोपल लुकाइल कुकर्म के कमी तबो गाँव-जवार में ना रहे। गंगाजी के बाढ़ से पाप धोआए के मान के ना रहे। आजु त गंगाजल से हमार धरती माई भिंजते नइखी!

हमरा गाँव के पानी बड़ा तेज है। बाभन के गाँव राजपूत आ भूमिहार के गाँव से तीन ओर से घेराइल बा। कठोर से कठोर चुनौती के अपना पौरुष से मुकाबला कइके गाँव के स्वाभिमान के ऊँच रखले रहे वाला लोग बराबर मिसिर वंश में जामत रहले। चरमइया पट्टी के परतापी पुरुष रहले बड़का भाई । अपना समय में गाँव के मालिक रहले। उन्दुका तेज से गाँव ना, जवार काँपे । ओही पट्टी के कमेसर मिसिर बाद में गाँव के मुखिया भइले बड़ी तेज बुद्धि के आदमी रहले पढ़ाई-लिखाई हमरा बाबा के भी कुछ ना रहे, बाकिर बुद्धि में केहु ले बढ़ि के गाँव के मालिक रहले अपना समय में गाँव के प्रतिष्ठा के लड़ाई खातिर गाँव भरि के बीस बिगहा के एगो खेत रहे, छड़ी गाँव में कोड़ार बाबा नम्बरदार रहले कुँआ पिपर, कंचनपुर जमींदारी के गाँव रहे। बाबा के मुअते कोडार घूरे- धूर बिका गइल। मिसिर वामन के गाँव में एक पट्टी गौतम मिसिर के आ एक पट्टी चावे लोग के रहे। हमरे पुरुखा एह नतुहा लोगन के अपने बगल में जगह-जमीन देके बसवले रहे। हमनी के पाँवपुजवा बाभन ह लोग गौतम पट्टी के दुखी मिसिर हमरा बाबा के दुलरुआ भगत रहले बाबा उन्हुका के बेटा लेखा छोह में बोरले रहसु हमरा जिए-जागे के मंगल भाव से दुखी काका हमरा के एक पइसा में किनले रहले गाँव के उत्तरी दुआरि पर राधाकिसन चौबे के बहुत बड़ पक्का मकान रहे। सउँसे गाँव में दुइगो ईंटा के मकान रहे ओह घरी, हमरा लइकाई में एगो राधाकिसुन चौबे के आ दोसर घर मइया पट्टी के रामतपेसा मिसिर के। 1942 के आन्दोलन के बाद दुआठा के गाँवन पर सरकारी जुलुम शुरू भइल रहे। घर-घर के औकात ऑकि के जुर्माना, भरि गाँव के नम्बरदार आ मालिक रहले हमार बाबा सबले भारी जुर्माना उन्हुके ऊपर लागल रहे। खेत रेहनि राखि के बाबा आपन इज्जत बचवले रहले। बाद में माई बतवले रहे। दुखी मिसिर लेखा बाबा के भरोसामन्द नूनू घर के बलेसर मिसिर रहले बाबा के संसार छोड़ला के बादो नेह के नाता जस के तस बनल रहे। हमनी के उन्दुका के बड़का बाबूजी कहीं जा। बाबूजी भाईजी कहसु ।

अहीर, कमकर, कोहार, कुर्मी, मियाँ, तेली, बनिया, चमार, दुसाध, गोंड़, भर से हमार गाँव भरल-पूरल लागे गाँव के खास लोगन के असली नाँव के संगे कुछ दोसरो पुकार के नाँव रहे। गाँधीजी, राजाजी, कप्तान साहेब, कम्पोटर जइसन नाँवे से कुछ लोग जानल जात रहे। बाबा घर के छतरधारी मिसिर आ मुंसी मिसिर गाँव में सूदि पर रुपिया चलावे लोग। गाँव के मालिक रईसी में जिए वाला हमरा बाबा के जब हाथ खाली होखे, ओही लोग किहाँ जाए के परे बाबा के सुभाव में दीनता ना रहे। करजा देबेवाला भी उन्हुका से दबि के इज्जत संगे बतिआवे। बाबा घर में छतरधारी बाबा सबसे मेहोन आ सौखीन रहले। बंगाल में जगह- जमीन आ गोला रहे ओही पट्टी के हरिहर मिसिर बाबूजी के संघतिया रहले साधू आदमी, सत्संगी आर्य समाजी। उन्हकर अधिका समय हमरे बगइचा आ दुआर पर कटे बाबा के राग में रामायन सुनावसु । दुआरे दुआरे रामायन बाँचे के संस्कार रहे। बाकिर नाच देखे लोग दूर आन गाँव तक भागि जाए। भिखारी ठाकुर आ बनारस के मुकुन्दी भाँड़ के ओह घरी बड़ा नाँव रहे। भिखारी ठाकुर के नाच में भी लोगन के हाथे कुसंस्कारे लागे। गोड़ऊ नाच के हुड़का, बोल आ मुद्रा भदेसपन के ओरि पर पहुँच जाए। मेहरारुन के दबल भूखि डोमकच ( औरतन के प्रहसन आयोजन, बेटा के बियाह करे विदा कइला के राति में आयोजित) में आ मरदन के गोंड़ऊ नाच आ कबीर-जोगीरा के बोल में खुलि के प्रकट होखे । अइसन बेलगाम के बोल जे फेंड़ो-खूंटा काम-वासना से बउरा उठे। हमरा गाँव के गवनई के मेठ सीतानाथ चाचा बड़ा रसगर आदमी रहले हमरा पट्टीदारी में एगो बालविधवा रहली-तपसी मिसिर बो। गोर धूप-धप् रूप के आगार नीम पागल रहली नाता में बाबा के चाची लागत रहली गाँव भरि घूमत रहल रहली घूमत-घामत जब हमारा अँगना में दुकस, माई अगराइ के खिल जाए। हमनी के बुढ़िया आजी कहीं जा, बाकिर उन्हुका से लइकाई में बड़ा डर लागे। माई छीपा में पानी भरि के बुढ़िया आजी के बेवाइवाला रूखर धूरि-पाँक के डूबल पाँव पखारे, जइसे बड़ा भागि से भगवती अँगना आइल होखसु खात खा बुढ़िया आजी बुदबुदात रहसु आ माई बेना डोलावत रहत रहे। हमरा घर के पिछुआरी राजा घर के जमीन में राजरस कमकर के घर रहे। राजरस हमरा अँखफोर होखे के पहिलहीं मरि गइल रहले राजरस कमकर के मेहरारू बड़ा बरियार रहली शेरनी नियर गरजि के बोल उन्हुका आगे दरसन तिवारी के घर रहे। दरसन तिवारी के माई के हमनी के सब भाई बहिनि कनिया मइया कहीं जा। हमरा अँगना से उन्हुकर परान जुड़ल रहे। खासु पिअसु अपने घर, बाकिर राति में माई के संगे सुतसु। माता के परकोप से बोली बिगड़ गइल रहे हमनी के बड़ा छोह से गाइ के गीति आ कथा सुनावसु। पदुम काका के महतारी दूधनाथ चौबे बो बरियार सुत्रर मेहरारू रहली बड़की ईआ से खूब पटरी बइठे। ईआ उन्हुका के चौबाइन कहसु आ नतुहा बाभन के घर के मेहरारू के आदर -छोह में बोरले रहसु पानी भरेवाली विरिछा वो के हमनी के भाई बहिन काकी कहीं जा। माई देवराइन कहे। उन्हुका सासु भदई वो के रउताइन । माई के बाद सबले आपन बुझासु पिछुआरी वाली ईआ जिला में नामी पहलवान जलेसर मिसिर के महतारी। हमरा छीको आवे त घउरल हमरा अंगना में पहुँच जास आ आपन टोटरम चालू क देसु देखे में साधारन गँवई मेहरारू, बाकिर भीतर छोह के सागर बराबर जागल रहत रहे। राजा घर के हरदयाल काका बो के हमनी का भटजी कहीं जा। उन्हुका बड़हन आँगन में बड़ा भारी अंवरा के पेड़ रहे। फर बहुत छोटे-छोटे भउजी के अँगना में फेंड़ छोड़ि के अइसन कुछऊ ना रहे जेवना से आँगन मनसायन लागे। टोल-पड़ोस के लड़का-लड़की के अइला से कबो-कबो अँगना तनी बोले । हरदयाल काका, सुन्दर सुभेख, आँगन से बहरी पूजा-पाठ में लीन रहसु । लइका फइका ना रहे। साँची के भउजी रहली, रामासीस भइया बो करिया पनिगर चेहरा सौखीन अइसन कि दाँत में सोना मढ़वले रहली आ मिस्सी लगावसु। रामाधार बाबा बाबूजी के लंगोटिया इयार रहले, एहसे उन्हुका आँगन से हमनी के भावना जुड़ल रहे। बाकिर फागुन में उन्हुका आँगन में गइला पर बड़ दुर्दसा होखे भउजी के बेटा के उमिरि के हमनी का रहनी जा। बाकिर फागु में देवर भेटाइ जाइ त भटजी किहाँ माफी ना रहे। घइ के नाद में बोरि देसु । फगुआ के दिने पिअरी से संजि के हमनी के बाट जोहत रहसु दखिन टोला में बाबा के परजन के कई गो घर रहे। कुछ गोड़िन के चरित्र के लेके गाँव में तरह-तरह के बात होखे । भदई बो हमरा घर के पनिभरिन रहली पतोह संगे बर्तनो उहे माँजसु, बाकिर मालिक के एकलौती पतोह हमरा माइयो के जब-तब डपटि के बोलसु। हमनी के उन्हका के आजी कहीं जा। माई रउताइन कहे आ बड़ा नरम होके वोले ।

दहारी कुर्मी आ रामलाल अहीर हमरे पट्टी के जमीन में बसल रहे लोग। बाबा के दरबार में जब आवे लोग, निपट गँवार होखलो पर, ओह लोग के बतकही राज दरबार में पोसाइल आदमी के बतकही बुझाय नाट कद के दहारी बुद्धिमान रहले। ओह जमाना में अपना बेटा लक्खी के अंगरेजी पढ़वले। बाद में रउती के आगे दोअर में जाके दहारी बसि गइले । लक्खी के रेल विभाग में नौकरी मिलि गइल ।

बहुत बाद में मंठिया के दक्खिन बारी में एक घर नेटुआ कहीं अन्ते से आके बसल दू-तीनि भाई पहलवानी में रहे लोग गाँव में मधु बेचे आ गोदना गोदे ओह घर के पतोह आवे। बड़ा चलवीधर रहे। ओहू घरी गाँव में काँच लंगोटवाला (लम्पट) लोग रहे। डिठार नाँव दुइए चारि गो रहे। लुकाइल पाप बाभनो घर में कम ना रहे कटिया के समय चइत बइसाख में उत्तर ओरि से दुनिया भरि के मजूर आ जाए, परिवार लेले देले। लम्पट लोग ओह मौसम के बेयाकुल होके बाट जोहे ओही बनिहारन में से धीरे-धीरे कुछ भर हमरा गाँवे बसि गइले ।

विकार के दूह आ गरीबी के पहाड़ से लड़त लड़त गाँव के हँसल-बोलल-गावल मरुआइल ना रहे। एके राग में सैंउसे गाँव गावत-जिअत रहे। कार्तिक में गंगा नहान करे जात मेहरारून के झुंड गावत जाए- 'अपना जीव अस उनकर जनिह तब हरि मिलिहें हो राम।' सुनते आँखि के सोझा अँजोरिया छाइ जाय। एने गाँव आपन रहनि छोड़ि के शहर के नकलची बनि गइल बा । अपने गाँव चिन्हात नइखे। कबो-कबो बुझाला जे आन गाँव में गइल बानी । कबो बुझाला जे हमार गाँव मरि-बिलाइ गइल आ अन्ते के लोग हमरा भूगोल के हड़प लेले बा, ओह भूगोल में जहाँ अँखफोर भइनी, जहाँ कंठ फूटल, जहाँ के छोह मन के जमीन के उपजाऊ बनवलसि । हँसल-बोलल भुलाइ के लोग पसेरी भरि के मुँह लटकवले अहंकार के आगि में जरत राख होत जाता। पड़ोसी भूमि के कैफी आजमी के उदासी मन परि जाले, 'ये हमरा गाँव है और ये हमारे गाँव के चूल्हे, जहाँ आग तो आग धुंआ भी नहीं मिलता।' घर- घर से आगि माँग के चूल्हा जरावेवाला आत्मीय भाव कहाँ बिला गइल ? दुआरे दुआरे फगुआ गावेवाला गँवई शिष्टाचार के के ढाठी दे दिहल ? गाँव अतना गंभीर कइसे हो गइल ? ई बिपत्ति के पहाड़ गरीबी के पहाड़ ले भारी बा । सोचि के मन रोआइन पराइन हो जाता, ई अन्हरिया छँटी हो राम कब हरि मिलिहें हो राम!

अउरी कॉमिक्स-मीम किताब

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लेख
हमार गाँव
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भोजपुरी के नयकी पीढ़ी के रतन 'मयंक' आ 'मयूर' के जे अमेरिको में भोजपुरी के मशाल जरवले आ अपने गाँव के बचवले बा
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इमली के बीया

30 October 2023
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लइकाई के एक ठे बात मन परेला त एक ओर हँसी आवेला आ दूसरे ओर मन उदास हो जाला। अब त शायद ई बात कवनो सपना लेखा बुझाय कि गाँवन में जजमानी के अइसन पक्का व्यवस्था रहे कि एक जाति के दूसर जाति से सम्बंध ऊँच-न

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शिवप्रसाद सिंह माने शिवप्रसाद सिंह के गाँव

30 October 2023
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हमरा त आपन गँठए एगो चरित्र मतिन लागेला जमानिया स्टेशन पर गाड़ी के पहुँचते लागेला कि गाँव-घर के लोग चारो ओर से स्टेशनिए पर पहुँच गइल बा हमरा साथे एक बेर उमेश गइले त उनुका लागल कि स्टेशनिए प जलालपुर के

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घर से घर के बतकही

30 October 2023
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राप्ती आ गोरी नदी की बीच की कछार में बसल एगो गाँव डुमरी-हमार गाँव। अब यातायात के कुछ-कुछ सुविधा हो गइल बा, कुछ साल पहिले ले कई मील पैदल चल के गाँवे जाय के पड़े। चउरी चउरा चाहे सरदार नगर से चलला पर दक्

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हिन्दी भुला जानी

30 October 2023
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पर किस तरह मिलूँ कि बस मैं ही मिलूँ,  और दिल्ली न आए बीच में क्या है कोई उपाय !                                                -'गाँव आने पर जहाँ गंगा आ सरजू ई दूनो नदी के संगम बा, ओसे हमरे गाँव के

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का हो गइल गाँव के !

30 October 2023
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गाजीपुर जिला के पूर्वी सीमान्त के एगो गाँव ह सोनावानी ई तीन तरफ से नदी- नालन से आ बाढ़ बरसात के दिन में चारो ओर से पानी से घिरल बा। एह गाँव के सगरो देवी देवता दक्खिन ओर बाड़न नाथ बाबा आ काली माई आमने-स

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कब हरि मिलिहें हो राम !

31 October 2023
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गाँव के नाँव सुनते माई मन परि जाले आ माई के मन परते मन रोआइन पराइन हो जाला। गाँव के सपना माइए पर टिकल रहे। ओकरा मुअते नेह नाता मउरा गइल। ई. साँच बात बा, गाँव के माटी आ हवा पानी से बनल मन में गाँवे समा

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भागल जात बा गाँव

31 October 2023
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भारत के कवनो गाँव अइसन हमरो गाँव बा। तनिएसा फरक ई वा कि हिन्दी प्रदेश के गाँव है। आजकाल्ह पत्रकार लोग हिन्दी पट्टी कहत बाने एगो अउर फरक बा। हमार गाँव बिहार की पच्छिमी चौहद्दी आ नेपाल देश की दक्खिनी

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जेहि सुमिरत सिधि होय

31 October 2023
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साकिन जीवपुर, पोस्ट देउरिया, जिला गाजीपुर। देवल के बाबा कीनाराम के परजा हुई। गाँव में राज कॉलिन साहेब के जरूर रहे, उनकर नील गोदाम के त पता नाहीं चलल, लेकिन हउदा आजो टूटल फूटल हालत में मिल जाई बिना सिव

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थोरे में निबाह

31 October 2023
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छोटहन एगो गाँव 'महलिया' हमार गाँव उत्तर प्रदेश के देवरिया जिला के सलेमपुर तहसील में बसल ई गाँव । कवनो औरी गाँव की तरे, न एकर बहुत बड़हन इतिहास न कवनो खास खिंचाव । एहीलिए न एकर कबो खास चर्चा भइल, ना सर

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इयादि के धुनकी के तुक्क-ताँय

1 November 2023
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हमार गाँव दुइ ठो ह दोहरीघाट रेलवई के पीछे उँचवा पर एक ठे गाँव ह 'पतनई'- घाघरा के किनारे ओहीं जदू से बलिया ले नहर गइल है। जात क राही में नील के खेती क पुरान चीन्हा मिले। एक ठो नाला बा आ ओकरे बाद खेत रह

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पकड़ी के पेड़

1 November 2023
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हमारे गाँव के पच्छिम और एक ठो पकड़ी के पेड़ बा। अब ऊ बुढ़ा गइल बा । ओकर कुछ डारि ठूंठ हो गइल बा, कुछ कटि गइल बा आ ओकर ऊपर के छाल सूखि के दरकि गइल बा। लेकिन आजु से चालीस बरिस पहिले कहो जवान रहल। बड़ा भा

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जइसन कुलि गाँव तइसन हमरो

1 November 2023
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ग्राम-थरौली तप्पा बड़गों पगार परगना-महुली पच्छिम तहसील सदर जिला- बस्ती। एक दूँ दूसरको नक्सा बाय ब्लाक-बनकटी आ अब त समग्र विकास खातिर 'चयनित' हो गइल गाँव । चकबंदी में बासठ के अव्वल रहल, अबहिन ओकर तनाजा

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मिट- गइल - मैदान वाला एगो गाँव

1 November 2023
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बरसात के दिन में गाँवे पहुँचे में भारी कवाहट रहे दू-तीन गो नदी पड़त रही स जे बरसात में उफनि पड़त रही स, कझिया नदी जेकर पाट चौड़ा है, में त आँख के आगे पानिए पानी, अउर नदियन में धार बहुत तेज कि पाँव टिक

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गहमेर : एगो बोढ़ी के पेड़

2 November 2023
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केहू -केहू कहेला, गहमर एतना बड़हन गाँव एशिया में ना मिली केहू -केहू एके खारिज कर देता आ कहेला दै मर्दवा, एशिया का है? एतना बड़ा गाँव वर्ल्ड में ना मिली, वर्ल्ड में बड़ गाँव में रहला क आनन्द ओइसहीं महस

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बनै बिगरै के बीच बदलत गाँव

2 November 2023
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शंभुपुर शुभ ग्राम है, ठेकमा निकट पवित्र ।  परम रम्य पावन कुटी, जाकर विमल चरित्र ।।  आजमगढ़ कहते जिला, लालगंज तहसील |  पोस्ट ऑफिस ठेकमा अहे, पूरब दिसि दो मील ।।  इहै हौ 'हमार गाँव', जवने क परिचय एह

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कवने गाँव हमार !

2 November 2023
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सभे लोगिन अइसन आज कई दिन से हमरा अपना गाँव के बारे में कुछु लिखे आ बतावे के मन करता । बाकी कवना गाँव के आपन कहीं, इहे नइखे बुझात। मन में बहुते विचार आवडता एह विचारन के उठते ओह पर पाला पड़ जाता। सोचऽता

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बाबा- फुलवारी

2 November 2023
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ई बाति 1971 के है रेडियो पर एगो गीति अक्सर बजल करे-'मैं गोरी गाँव की तेरे हाथ ना आऊँगी।' तनी सा फेर- -बदल कके एगो अउरी स्वर हमरी आगे पीछे घूमल करे- 'मैं गौरी गाँव की, तेरे हाथ ना आऊँगी।' बाति टटका दाम

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हींग के उधारी से नगदी के पाउच ले

3 November 2023
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बहुत बदलि गइल बा हमार गाँव। कइसे? त देख शहीद स्मारक, शराबखाना, दू ठे प्राइमरी स्कूल, एक ठे गर्ल्स स्कूल, एक ठे मिडिल स्कूल, एक ठे इंटर कालेज, डाकखाना आ सिंचाई विभाग के नहर त पहिलहीं से रहल है। एक ठे छ

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शहर में गाँव

3 November 2023
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देवारण्य देवपुरी। देवरिया। बुजुर्ग लोग बतावे कि देवरिया पहिले देवारण्य रहे। अइसन अरण्य, जेमें देवता लोग वास करें। सदानीरा यानी बड़ी गण्डक के ओह पार चम्पारण्य, एह पार देवारण्य उत्तर प्रदेश आ बिहार के

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जइसे रे घिव गागर प्रकाश उदय

3 November 2023
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जे गाँव के गँवार हम दू गाँव के, हम डबल गँवार।  कि दो ओहू से बढ़ के पढ़े के नाँव प गाँवे से चल के जवना शहर कहाय वाला आरा में अइलीं तवन गाँवो से बढ़ के एगो गाँव। अगले बगल के गाँवा गाँई के लोग- बाग से ब

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एगो किताब पढ़ल जाला

अन्य भाषा के बारे में बतावल गइल बा

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