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नवका चुनाव

11 January 2024

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गाँव के सगरी पढ़वड्या लइका एकवटि के मीटिंग कइलें सन। मीटिंग में एह बात पर विचार भइल कि परधान आ पंच लोगन के जवन चुनाव होखे जात बा, ओमे परचा भरे वाला लोग के योग्यता के परख कइसे होखे। आजु ले ता जे जे परधान भइल, ऊ आपन घर भरि लिहल आ गांव में कवनों विकास के कामकाज ठीक से नाहीं भइल। अउर गांवन के मोकाबिला में एह गांव के सरकारी रूपेया तिनगुन्ना मिलेला काहें कि ई हरिजन आबादी वाला गांव घोषित हो गईल बा। पहिले बेर परधान भइले पुत्रू महरा। चमटोली में खड़ंजा बनावे के बजट आइल त सेम ईंटा से बनवा दिहलें। तिसरकी बरसात में पहिले जइसन हो गइल। गरीबी रेखा से निच्चेवालन के घर बनावे के बजट आइल त चोन्हर मिसिर के बंगला बनि गइल। एक दलाल के घारी बनि गइल। आठ घर बिना खेत खरिहान वाला हरिजन लोग के रहल। ओह लोग के पूछे वाला केहू नाहीं रहल। अब्बो ओह लोग के झोपड़ी जस के तस बा। एक दू जने हिम्मत कऽ के परधान से पूछे गइलें त जवाब पवलें कि अगले बेर तहन पांच के घर पक्का हो जाई। चोन्हर मिसिर आ पुन्नू परधान नवकी हीरो होंडा पर चढ़ि के जब गांव से निकलेला लोग, तो गांव थरथराए लागेला। छोटुआ ओह लोगन के चिखना बनावे वाला चेला हऽ। एकाध चुक्कड़ ऊहो पा जाला बिलइती बोतल में से। जगधर से छोटू बतवलें रहलें कि चोन्हर आ पुन्नू परोगराम बनावत रहल लोग कि अगिला बजट आई त एगो मारूति कार कीनल जाई। गांव के लड़का सनसना गइलें एह खबर पर। एकजने कहलें, कुछ

अइसन उपाइ कइल जाव कि एह बेर केहु इमानदार अदिमी परधान बनो।

पप्पू कहलें, "जबले परधान नाहीं बनल बा तबले सभे इमानदारे बा। बनि

गइले के बाद न बुझाई कि के केतना ईमानदार बनल रहि जाला ? पुन्नू परधान भइले से पहिले बेइमान रहलें ? सब लोग त इहे कहे कि बड़ा सच्चा मनई हवें। इनहीं के वोट दियाव। आ परधान भइलें कि इमानदार पुन्नू के सबसे बड़हन इयार हो गइलें चोन्हर मिसिर। ऊ पावें त गांव के गांव घोटि जा आ डकारो लिहले बिना हजम क लें।

'तब आखिर उपाइ का बा ? ई गांव का एह राहु केतु की पंजा में से निकलबे नाहीं करी ? मंजुल कहलें।

'एक्के उपाय बा नवका लोग चुनाव लड़े।' सुल्तान कहलें।

'जे अठारे साल के हो गइल बा कहे न परचा भरि सकेला। जेकर दुइयो चारि महिना कम बा, ओकर त नावे नईखे वोटर लिस्ट में।' मंजुल कहलें।

'जे खड़ा होखे लायक बा, ऊ खड़ा होई। बाकी लोग अपनी अपनी माई बहिन के समुझावें कि एह राहु केतु के हरावल जरूरी बा। सबके राय बनल कि जे जे परधान आ पंच के परचा भरल चाहे, ऊ पंचायत के सामने आ के बतावे कि जीति गइले पर ऊ गांव के विकास खातिर का करी ? - सुल्तान कहलें।

राति भइल। पुत्रू परधान के नवका बइठका में चोन्हर मिसिर आ परधान के बइठकी जमल। विलइती के बोतल खुलल। छोटका करेजी के चिखना बना के दिहलसि। जब रंग जमे लागल तबले बकुलवा धीरे से पल्ला सरका के ढुकल। पुत्रू परधान चिहा गइलें। ई बभनन के जासूस कहाँ से आ गइल ? चोन्हर मिसिर अलगे आपन गिलास छिपावे लगलें।

बकुलवा आपन मुँह पुत्रू परधान की कान से सटा के कहलसि-'हम तहरा फैदा खातिर आइल बानी। आजु पढ़वइया लइकन के मीटिंग भइल हऽ। ओमें तहन पांच के राहु केतु बतावल गइल ह। राय ई बनल हऽ कि परधानी के परचा भरे वाला लोग बताई कि जितले पर गांव के विकास खातिर कौन कौन काम करी लोग। जे सबसे अच्छा काम करे के वादा करी ओही के वोट दियावल जाई। बकुलवा के बात सुनते पुन्नू हंसि परलें। चोन्हर से कहलें- 'काऽ हो इयार। अब हई बच्चा पार्टी एह गांव के राजनेति चलाई।'

चोन्हर बकुलवा की बात पर धेयान नाहीं दिहलें। ऊ जानेलें, दिनभर कचहरी में एह मुंसी से ओह मुंसी के चाहपान जुटा के दस पांच रूपया कमा लेला। माई बाप के ऊहे हाल, जहें चाटे के मिलि जा, परल रही लोग। बकुलवा एहर के बात ओहर कइले में माहिर मानल जाला। चोन्हर कहलें 'जाये द इयार जब आई तब देखल जाई। अबहिएं से काहें झंखल जाव ?'

पुन्नू परधान तबले टुन्न हो गइले रहलें। बकुलवा के आपन चुक्कड़ थमा दिहलें आ कहलें।" ल तुहूं पीयऽ। एही लेखा ओहर के बात बतावत रहबऽ त तहरों खेयाल राखल जाई। बकुला पुन्नू परधान के चुक्कड़ ओठे से लगा के एक्के सांस में चढ़ा लिहलें। चोन्हर छोटुआ से कहलें-'अरे बकुलवो के चिखना दे दे। एक बेर ओकर चुक्कड़ अउर भरि दे।' छोटुआ बकुला के चुक्कड़ भरि के उनके हाथे में थमा दिहलसि आ एक ठे चिखना पकड़ा दिहलसि। बकुला चिखना टूगि टूगि दारू के मजा लेबे लगलें।

परचा भरले के दिल आइल। पढ़वईया लोग मीटिंग पर मीटिंग करत रहि गइलें। केहु पंचाइत के सामने अपने मुंह से आपन बात कहे के तैयार नाहीं भइल। बकुला के काम चटकि गइल रहल। तिसरे चउथे दिन उनके विलइती आ चिखना मिले लागल। चोन्हर मिसिर के भाव बढ़ि गइल। पुन्नू परधान खर्च करे खातिर हाथ खोलि दिहलें। "कवनों तरे एह बेर चुनाव जीते के बा। ईहे रट लगवले रहें। बीडिओ साहेब, एडिओ साहेब, सचिव साहेब के ठीक कइले के जिम्मा चोन्हर मिसिर अपनी कपारे ले लिहलें। पढ़वईया लोग के बीच में फुटमत के जिम्मा पुन्नू परधान बकुला के दे दिहलें। बकुला के एक ठे हरियरकी की गड्डी पकड़ा दिहलें आ कहलें- 'देखऽ एह बेर कौनो न कौनो तरे सुल्तान, मंजुल आ पप्पू के आपस में लड़ा दऽ। चुनाव हो जाई, हम जीति जाइबि, त तहरो जनम सुधारि देबि। कुछ कमाए लगबऽ त पाछे हरदियो लागि जाई। नाहीं करबऽ त जनम भर एही लेखा बांड़ बनल घूमत रहबऽ।' बकुला पहिलही से तनल नटई के अउर तानि दिहलें आ कहलें 'परधान जी, बेफिकिर रहीं। ओह लोग के लड़ावल हमरे बाया हाथ के खेला बा। पुन्नू परधान उनके पीठि सोहरावत मोटरसाइकिल का ओर बढ़ि चललें। चोन्हर मिसिर नवका कुर्ता धोती इंटले लमहर डेग बढ़वले चलि आवत रहलें। देखते देखते हीरो होंडा गरजत बलाक दफतर कावर उड़ि चलल। 

बकुला नोट की गडडी अपने पैंट की जेब में खोसत रहलें, तबले छोटुआ उनके पहुँचा धऽ दिहलसि। बकुला डॅटलें 'छोडु, हाथ छोडु ।' छोटू तेवर बदलि के कहलें 'देखऽ एक गड्डी में से आधा हमके दे दऽ।'

बकुला के नटई अकासे कावर तना गइल। कहलें 'जो भागु। आधा नोट तोहके काहें दे दी ?'

छोटुआ के आँखि मुसुकाइल। कहलसि-'ठीक बा। मत द। हमरा अउर कुछ नाहिं करे के परी। तहरी बिरादरी में एतने बतावे के परी कि बकुला पुन्नू परधान की चुक्कड़ में...

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