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कनक किशोर के कविता

18 November 2023

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झारखंड वन सेवा के सेवानिवृत्त पदाधिकारी भोजपुरी आ हिन्दी लेखन कार्य में समान रूप से जुड़ाव अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन, पटना के सदस्य। हिन्दी / भोजपुरी के आधा दर्जन पुस्तक प्रकाशित | जोहार भोजपुरिया माटी, साझा संग्रह के संपादन।

पता : राँची (झारखंड), चलभाष 9102246536

ममता के संघर्ष

माई के ममता कुलांच मरलस त युद्धो ना रोक पवलस माई के गोड़ आ बढ़ चलल पूत से मिले युद्ध के विभिषिका के बीच आपन देस यूक्रेन

एक देने रह रहके बर्फबारी दूर दूर तक आदमी के नांव ना उबड़-खाबड़ सड़क पर एगो मेहरारू मन में डर कि कहीं से गोली भा धमाका ना हो जाये, ई झांकी लवीव के ह जहाँ एगो माई बदहवास जात बिया अपना बेटा से मिले गोली बम से बेपरवाह ।

अलिसा स्पेन दौरा बीच में छोड़ आपन नव साल के बेटा किरिल से मिले पहुंच गइली यूक्रेन के सीमा पर स्थित लवीव 

सब कोई भरोसा देता कि जल्दिये घरे पहुंच जइबू आपन गाँव मारियुपोल, अलिसा जानताड़ी जोखिम भरल ई काम कवनो चुनौती से कम नइखे बाकिर ममता के कुलांच उनकर डेग बढ़े के मजबूर करता बेटा के ओरिया, उनका बिसवास बा कि उनकर ममता के जीत होई आ ऊ अपना बेटा से मिल पइहें जवन साथ लेले आज युद्ध के बीच धइले बाड़ी गोड़ अपना धरती पर।

ई कहानी खाली अलिसा के ना ह

नताली खलेम, अन्ना एम्ब्रामोसोवा

आ ना जाने केतने माई के ह

जे कबो गोला-बारूद के सिकार हो जाई

बाकिर मन में एके धून सवार बा

कि चाहे जे होखे

हम अपना लइका से मिल के रहब

हमरो बिसवास बा

जीत माई के ममता के होई ।

मेहरारूअन

मुअही खातिर जन्म लेली सं ई मेहरारू अन घरी घरी जीयली सं मउवत के जिनिगी 

लइकाई से लेके बुढ़ापा के दरवाजा तक, सांचे त ह5 घरी घरी मुअल ओहनी के दुखित ना करेला स्वभाव जे पड़ गइल बा कबो नइहर, कबो सासुर कबो मरद, कबो लइकन के खुशी आ जिनिगी खातिर अपना के मुआवे के

'दूधो नहाओ पूतों फलो' के आसीष पावेली सं बाकी दूध पीयल त करम में बा ना नहइहें सं का? हैं! पूतवन खातिर फरे के पड़ेला बेर-बेर बंश बढ़ावे खातिर पर ना पूजल जाली ओहू खातिर पुजल जाला बांस, हाय रे विधाता ओहनी के हिस्सा के सुख अउर जिनिगी ओहनी के अँचरा से छीन तूहूं बाँट देल दोसरा के कइसन हऽ ई तोहार न्याय? '

सौभाग्यवती भव' आसीष तोहरा आँचर में डलल सं तोहार आपन लोगिन के संगे पंडित, पुरोहित लोगिन, पति से पहिले मुए के कहल गइल तोहार घूंट-घूंट के मुअल देखके ना मरद के अधिका जियावे के हक देखि 

हम ना वृझ पवनी आज ले अइसन कांहे? असहूं जियला त मरदे नूं तूं तऽ आज ले जियलू कहवाँ आपन हिस्सा के जिनिगी आपन हिस्सा के सुख

बराबरी के डफली मरदे लोग नू थमवले बा उहो फाटल, कमजोर, तूं तऽ बराबर रहू जन्मे से, सांच पूछ तऽ तूं जन्म देवे वाली माई बराबरी कहवाँ तोहरा से मरदन के जे पललन तोहार बहियन में सिंच तूं छाती के दूध पीयाके बाकिर ऊ दूध के लाज रखल ना जनलस समय पड़ेला तऽ आगे आ जाला अग्निपरीक्षा लेवे खातिर कबले बैदेही बनवू?

एगो बात आउर तूं तऽ हरदम दाता रहल बाडू अधूरा बा तोहरा बिना मरद समाज, मउवत के मुँह से निकलले बाडू सत्यवान के, जीवन बॉटेलू तूं जीय अब तूहूं जीय तनिका सा आपन हिस्सा के जिनिगी तनिका अपना हिस्सा के सुख। 

मेहरारू

मेहरारू आदमी ना होलि सं ओहनी के त खेलौना होलि सं मरदन के हाथन के, "नारी तू नारायणी" कहवाँ रहलू? तू त हो गइलू “नारी तू भोग्या "।

बाजार के चीज बनके रहि गइल बाड़ू विज्ञापन होखे भा सिनेमा तोहार मखमल जस देह के खूब परोसल गइल बाजार में, खरीदारों खूब मिलल मिलबो करित काहे ना ऊ लोगिन के खेलवना के सजाके नया रूप में पेश जे कइल गइल बा।

मरदन के नजर में तूं खाली मादा बाडू ऊ लोगिन के नजर तोहार शक्ति सत्ता पर ना तोहार देहिया पर होला तोहार त्याग पर तोहार सेवा पर ना काहे कि ओहनी के तऽ तोहार सुघर देहिया के चाह बा, ओकरें नतीजा तऽ 

कटुआ, हाथरस ह जहवाँ रोज कवनो निर्भया कवनो गिद्ध दृष्टि के सिकार होलि सं

मेहरारू

तूहूं तs आपन पहचान भूला गइल बाड़ू दुर्गा, काली आ सती के रूप छोड़ आइटम गर्ल के लबादा ओढ़ लेले बाडू आधा आबादी आपन सत्ता पहचान काल्हू भस्मासुर के मरले रहू आज तू तोहार सतीत्व के दुश्मन बहसी जानवरन के तऽ मारा

मेहरारू

तूं जन्म देवे वाली हऊ तोहरा बिना संसार अधूरा बा तूं बाडू तऽ धरती बा तूं तs धरती के नायिका हऊ तोहार बिना मरद के आस्तित्व कहवाँ तोहरा बिना घर दुआर कहवाँ तूं बाडू तऽ हम बानी तूही सरस्वती हऊ हमरा के बुद्धि द आजले ना समझनी तोहरा के अब तs समझी।

अभिशाप

तिरिया जनम विधाता के देन 

अभिशाप ना ह अभिशाप बना देलस ई पुरुष प्रधान समाज, माई, दादी, सासु आ ननद कम दोषी ना जे अपने नारी जाति के बचपन से आज ले दोयम दरजा देलस वस्त्र, खाना आ पढ़ाई तक में।

बेटा के ललसा में भ्रूण हत्या, धरती आ आकाश देखे के पहिले बेटी के माई के हाथे धूरा के हवाले कर देल महापाप ह5, पर दिन राति पूजा में अझुराइल माई ना बुझेली ओह के पाप काहे कि कोख उनकर ह बाकिर ओह कोख के मलिकार हुई पतिदेव जिनका बिटिया ना चाही, बिटिया से बंस ना नूं चले।

समय बदलल सोच ना, बिटिया कहाँ रहल पाछे बेटवन से कवनो माने में चाहे कवनो क्षेत्र होखे, बाकिर आजो पीछा नइखे छोड़त दहेज रूपी दानव जे दहेज के आगि में 

ओंक देता सुंदर विटिऊवा के. फॉस लेता आपन जाल में गिद्ध रूपी मानव जे हर सड़क पर बिछवले बा जाल, आजो असुरक्षित बिटिऊवा महसूस कर ले अपना के अभिशाप समझले ओह सुंदर देहिया के जेकरा के नोंचे खातिर गिद्धवा मंडराता चहुंओर हर सहर, हर गाँव ।

कोख हमार मालिक तूं ई का ह5, आज ले ना बुझल अब का बुझब मरद नूं हव ।

हमार कोख हमरा के माई बनावेला हमरा के पूर्णता प्रदान करेला बाकिर ओहू पर हमार अधिकार कहाँ बा तु इच्छा थोपेल जे हम ढोइना, 

हमरा के बाजार के वस्तु बनवल चुप रहनी आज हमार कोख बाजार में आ गइल सौदा हो रहल बा कोख के पिता बने के इच्छा जे पूरा करे के बा तोहार समाज त तोहार ह हमार इच्छा के कवन मोल।

कोख हमार बाकिर मरजी तोहार भुलियो के आपन मरजी चलाई तऽ तूही ना भीतर से तोहार अस्तित्व डोल जाला ओकरा के अनैतिक करार देल जाला औरत नूं हुई हमार देहो हमार ना तोहार ह5 ई तोहार अकेले के निर्णय ना ह5 पुरुष प्रधान समाज के ह5 जवना चीज पर पहिला अधिकार हमार बा उहो पर हमार कहाँ तोहरे अधिकार बा।

सांच तऽ इहे नू ह नौ महीना तक देह हम भारी राखिला अपने शरीर अपने पर भारी हो जाला नव महीना बाद हमरा पेट पर नश्तर चलेला मौत के नजदीक से हम देखिला अउर पिता रउवा बनिला बंश वृद्धि राउर होला हम छोड़ देल जानी आगे के तैयारी खातिर ई का हS?

इहो सांच हऽ हम तऽ अपना मरजी से माईओ ना बन सकी 

आ तू अपना मरजी के थोपत जब चाह गर्भवती बना द5 तबतक जबतक पुरान आटा के बोरी जस कोख झुलके बेडौल आ कमजोर ना हो जाय हम आधी आबादी जरूर बानी कहे भर के पर नइखी रोक पावत ई जुल्म समाज आजो तोहार हSI

इहो सांच हऽ असल में ई सब खेल कोखे से जुड़ल बा, एगो कोख से बाहर ना आवे तबतक दुसरा के तैयारी शुरू हाय रे कोख, पिता बने के सुख चाही तऽ तू हमरो के सिखावे के होई तऽ तू सांच तs इहो ह कि बालात्कार के धमकियो मरद तोहरे चलते दे पावेला ।

का का बताई केकरा के सुनाई ऊ सुने ना मरद हSI

बराबरी के बात

उनका बात में दम बा सुने के परि भीतरी खलवली बा ई बूझे के परि 

आधी आबादी, आजो जल रहल स्खलित समाज के जूझे के परी

बराबरी के बात, ऊ अब चाहेली अब ऊ ना दबिहें, ई बूझे के परि

उहो आदमी ह, खाली औरत ना देह से हटके, ई सूझे के परि

आदमी के विलोम, औरत ना होखे बुझौलिया छोड़ि के, ई बूझे के परि

कोखि कबले, बरदास्त करी बोझा बेटियो बंश के अंश, ई बूझे के परि

बेटी के जन्म, अभिसाप ना नूं ह किशोर बुझले, तोहरो बूझे के परि।

पंखिया जनि काटऽ

नाही चाही धनवा, ना चाही दवलतिया उड़े के चाहीं हमके खुला असमनवा बाबा तोहसे अतने विनीतिया, पंखिया जनि काट5 |

जाइब कवलेजिया, पढ़ब हम इंग्लिश बान्ह जनि गोड़वा में अब तूहूं बेड़िया

खेतवा से सीमा प ले हमरो के देखब ऊँचे तोहार राखब पगड़ी के, सनवा पापा तुड़े द पिंजरवा के जाल, पंखिया जनि काट

अंगुरी पकड़ी हमके कबले चलइबू अँचरा के छहिया में कबले लुकइबू पांखि नोंची गिद्धवा, मुड़िया मरोरब 

अनि दुर्गा दुसमन के जारिब खोरब माई रे पूरा करिब तोर अरमान, पंखिया जनि काटSI

अब ना बेचाई खेत दहेजवा के खातिर हम ना बनिब कटपुतरी के माफिक अब ना बिकाई भौजी गहना गुरिया खुली ना अब खुटवा से तोर धेनु गइया भइया हो पूरे द सपनवा हमार, पंखिया जनि काटSI

मरद के जाति छोड़ि, आँट में तूं आव मिलजुली सब अब काम सलिटाव बृझ नाही हमरा के अब तू अनेरिया नाही हम ह ई देख छेरिया बकरिया राजा हो हमरे से तोर परधनिया, पंखिया जनि काटS |

हमहूं आजाद हई, भारत के नारी हमके आजादी चाहीं छोड़ी लूगा साड़ी बरजल सुनी ना त गरजलो हम जानी जाग गइनी हमहूं अब रहब ना चुहानी मरदे सुन छोड़ गरभ गुमनवा, पंखिया जनि काट सामने खुला बाटे मोर असमनवा पंखिया जनि काटS |

हमहूं

हमहूं भरब उड़ान खुला आकास में, हमरो चाही हमरा हिस्सा के आकास जहाँ कवनो रोक-टोक ना होखे चिरई जस फुदकी एह डाढ़ि में ओह ढाढ़, अब पोस ना मानिब 

पिंजरा तूड़ी उड़ि चलब हमहूं।

दिल मांगे मोर

बेड़ी में रहनी आजु ले मन राखे खातिर थोड़िकी सा आजादी भीख में देल फुसलावे खातिर उहो शर्त पर लछुमन रेखा खीच जे हमरा कबूल नइखे मन नइखे भरत ठग मति देदS हमरा हिस्सा के स्वच्छंदता कि हमहूं आजाद घूमी खुला आकास में, हम आधा आबादी लेके रहब आजादी दिल मांगे मोरा

कठपुत

हम काठ के बनल कठपुतरी ना हई, 

हमहूं

हाड़-मांस के पिजर से बनल तोहरे जस आदमी, बाकी तू आदमी ना बूझलऽ कठपुतरी जस नचइलऽ अपना इसारा पर, घर के इज्जत कहि के लाँघे ना दिहल देहरी, नइहर से सासुर ले सगरो वर्जना के संसार हमरे खातिर बाकी अब बस कर बे पुछले लाँघ गइनी देहरी खुला आकास के खोज में बंधन के तुड़ि छोड़ि द अपना हाथ के डोर ना त काटि देव अंगुरी जे आजु ले नचवलस अपना इसारा पर अपना मर्जी से

पोसुआ चिरई

हे मरदे! आजु ले ना बूझलऽ अब का बूझब5 हम मेहरारू अन के, हमनी के बूझे खातिर अहम भाव मारि 

मेहरारू बने के पड़ी जे तोहरा बस में नइखे।

हमरा के आजु ले आदमी बूझल कहाँ? पोसुआ चिरई बना रखल अपना घर के आँगन में तोहार चम - चम चमकत सुनर रंगमहल हमरा खातिर सोना के पिंजरा तोहार देहरी ओह पिंजरा के गेट आ तूं जीवन साथी ना बहेलिया ।

अब छोड़ ई सब बात सुनिये के का करब आपन इज्जत चाह तऽ खोलि द अपना हाथे हमरा खातिर घर के देहरी ना तड हमरा भीतर उठल बवंडर उड़ा ले जाई तोहार देहरी आ हम उड़ि चलब खुला आकास में अपना पांखिन पर भरोसा करि चिरई के माफिक आ हमरो होखि आपन पहचान। 


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लेख
कनक किशोर की कविताएँ
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कठपुतरी बाग बागिया में बजेल बाँसुरी, अबेरी चढ़ेल पे चढ़ेल बताई। चंदनी रात में, चाँदनी रात में, कईया जुगनु बोलेल छाई। पवन भरे बहुत सुहावनी, देखे लोगन बोलेल कईया लाजाई। भोजपुरी भाषा में रंगीन बोल, कहे बातें बड़ी ताजगी से हमराई। अनूदित भोजपुरी का है रंग, पढ़ेल जब तक, बढ़वाई भाषा की शोभा। उम्मीद है यह किताब भी, बढ़ाएगी भोजपुरी भाषा का प्यारा।
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स्वप्ना मिश्र के कविता

11 November 2023
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आदरणीया स्वप्ना मिश्र समकालीन उड़िया साहित्य में एगो महत्वपूर्ण नाम ह। उनकर कुछ उड़िया कवितन के भोजपुरी अनुवाद प्रस्तुत बा। चयनित कवितन के हिन्दी अनुवाद राधू मिश्र जी कइले बाड़न चयनित कवितन के अनुवाद क

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चिरश्री इंद्रसिंह के कविता

11 November 2023
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चिरश्री इंद्रसिंह समकालीन उड़िया साहित्य में एगो प्रमुख नाम हा उहाँ के कुछ उड़िया कवितन के भोजपुरी अनुवाद प्रस्तुत बा। चयनित कविता के अनुवाद के आशय ओह कविता के प्रति धेयान खींच के मेहरारूअन के मन के द

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निर्मला पुतुल के कविता

11 November 2023
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निर्मला पुतुल आज परिचय के मोहताज नइखी। निर्मला पुतुल नारीवादी आ आदिवासी विमर्श साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर हुई। साच कहल जाव तs इनकर कवितन में सच्चाई के आग भरल रहेला जे सुतलो के जगावे आ मुअलो के जियावे

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अशोक लव के कविता

11 November 2023
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हिन्दी साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर जेकर एक सई से अधिका किताब अनेकन विधा में प्रकाशित हो गइल बा आज परिचय के मोहताज नइखन। उहाँ के एगो हिन्दी कविता के भोजपुरी अनुवाद। मूल : अशोक लव अनुवाद कनक किशोर लइकि

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नीतू सिंह भदौरिया के कविता

12 November 2023
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नीतू सिंह भदौरिया युवा कवयित्री हई। इनकर लेखनी स्त्री-विमर्श, थर्ड जेंडर, सामाजिक विसंगतियन के आपन कविता के विषय बनावल पसंद करेला वागर्थ में उनकर सामा चकई नाम के कविता आइल रहे, ओही कविता के भोजपुरी अन

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प्रवासिनी महाकुड़ उड़िया की वरिष्ठ कवयित्री हई जिनका दूनो भाषा में सहज आवाजाही बा स्त्री विमर्श इहां के पसंदीदा विषय ह। एह कविता के हिन्दी अनुवाद कुलजीत जी कइले बानी भोजपुरी अनुवाद सामने बा। मूल प्रव

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बिनोद कुमार राज 'विद्रोही' के कविता

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बिनोद कुमार राज 'विद्रोही' एगो युवा कवि हवन जेकर केतने संग्रह हमनी बीच आ गइल बा । उनकरा कवितन में माटी के सुगंध के साथे माटी के साथ जी रहल लोगन के समाज के दबल कुचलल लोगन के आवाज मुखर होके बोलत नजर आवे

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सुमन के कविता

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डॉ. सुमन सिंह के लेखनी हिन्दी आ भोजपुरी दूनो साहित्य के गति दे रहल बा। प्रेम, स्त्री विमर्श आ हँसोड़ व्यंग्य के साथे साहित्य के अनेक विधा में सुमन आपन जोरदार उपस्थिति दर्ज करत तेजी से आगे बढ़ रहल बाड़

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विजया एगो अहल राउंडर व्यक्तित्व के जानल पहचानल हस्ताक्षर हैं। साहित्य में कविता इहां के कलम के पसंदीदा विधा है। कला आ साहित्य के क्षेत्र में विजया के एगो आपन राह बा। प्रेम आ स्त्री विमर्श पर खुल के कल

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सारिका भूषण के कविता

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सारिका भूषण के लेखनी हिन्दी साहित्य के विभिन्न विधा में लगातार सृजनशील बा। उहां के कवितन में नारी के मन के भाव के बड़ी बारीकी से परोसल जाला जे पाठकन के मन के भीतर तक छू जाला । उहाँ के कुछ कवितन के भोज

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शुभा के कविता

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शुभा वरिष्ठ कवयित्री हुई। उहां के कवितन आम आदमी के संवेदना, वंचित- शोषित तवकन के दुख अउर रोष के समेटले रहेले। उहां के कुछ कवितन के भोजपुरी अनुवाद। मूल शुभा अनुवाद : कनक किशोर मातम मेहररूअन चारो दि

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अनिता रश्मि के कविता

12 November 2023
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अनिता रश्मि के लेखनी हिन्दी साहित्य के अनेक विधन जइसे कहानी, उपन्यास, कविता में समान रूप से प्रवाहमान बा। सामाजिक, सांस्कृ तिक भावनन के अपना रचना में एह तरह इहां के रखनी कि रचना पाठकन के आपन अनुभूति ल

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निशा राय के कविता

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निशा राय एगो युवा कवयित्री हई जे आज हिन्दी आ भोजपुरी दूनो भाषा के एक समान आपन लेखनी से समृद्ध कर रहल बाड़ी कविता प्रस्तुत करे के अंदाज इहां के मंचीय कवियन में एगो अलगे पहचान देले बा । इहां के रचना गाँव

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सरिता अंजनी के कविता

14 November 2023
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सरिता अंजनी 'सरस' युवा कवयित्री हई। इनकर कलम अनवरत स्त्री विमर्श आ सामाजिक समस्या के साथ लोगिन के मानसिक संवेदना पर चल रहल बा। जिनिगी से रूबरू हो जाला पाठक जब इनकर कविता से गुजरला । उहां के एगो कविता

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राजीव राय के कविता

14 November 2023
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राजीव राय भारतीय वन सेवा के सेवानिवृत्त पदाधिकारी हुईं। अपना साहित्यक साधना के रूप में रचनन के माध्यम से इहां के समाज के नया राह देखावे के कोसिस कर रहल बानी उहां के एगो हिन्दी रचना के भोजपुरी अनुवाद।

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सुरेंद्र प्रसाद गिरि के कविता

14 November 2023
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सुरेंद्र प्रसाद गिरि भोजपुरी आ हिन्दी साहित्य के नेपाल के सशक्त हस्ताक्षर हुई। साहित्य के अनेक विधन में इहां के कलम लगातार काम कर रहल बा। उहां के एगो हिन्दी रचना के भोजपुरी अनुवाद | सुरेंद्र प्रसाद ग

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डॉ. मधुबाला सिन्हा के कविता

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डॉ. मधुबाला सिन्हा हिन्दी भोजपुरी के एगो जानल पहचानल नाम ह, जेकर कलम अनेकन विधा में लगातार आपन उपस्थिति दर्ज करा रहल बा। उहां के कुछ हिन्दी कवितन के भोजपुरी अनुवाद। मूल डॉ. मधुबाला सिन्हा अनुवाद: कनक

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शुभ्रा बनर्जी के कविता

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शुभ बनर्जी सोसल मीडिया पर आपन हिन्दी कविता के साथ बराबर उपस्थिति रहेली। इनकर प्रतिलेख पर आइल एगो हिन्दी कविता के भोजपुरी अनुवाद। मूल शुप्रा बनर्जी अनुवाद: कनक किशोर चरित्रहीन कवनो मेहरारू अकेलही चर

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ठाकुर बेलवासे के कविता

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ठाकुर बेलवासे के मूल नेपाली कविता के हिन्दी अनुवाद रामप्रसाद साह, कलैया, बारा, नेपाल कइले बानी प्रस्तुत बा भोजपुरी अनुवाद। मूल ठाकुर बेलवासे अनुवाद: कनक किशोर मनकुमारी पतो ना चलल खुदही लापता जिनिगी

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पुष्पा जमुआर के कविता

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पुष्पा जमुआर हिन्दी के वरिष्ठ कवयित्री हुई उहां के एगो हिन्दी कविता के भोजपुरी अनुवाद। मूल पुष्पा जमुआर अनुवाद: कनक किशोर : पत्थर रूक तूं राम हमरा के छुइह मत हमरा के पत्थरे बनल रहे 45 जदी रउवा हमरा

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आलोक तिवारी के कविता

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आलोक तिवारी की लेखनी छंद और छंदमुक्त कविता में एक समान अधिकार राखेला । उहां के एगो हिन्दी कविता के भोजपुरी अनुवाद | मूल : आलोक तिवारी अनुवाद: कनक किशोर बाबा बाबा जंगल जात बानी लकड़ी लेवे दुपहरिया

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एलिजाबेथ ड्रिव स्टोडार्ड के कविता

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एलिजाबेथ ड्रिउ स्टोडार्ड (1823-1902) अमेरिकी कवयित्री । परंपरा आ नया मूल्यन के बीच तनाव के मनोवैज्ञानिक गहराई के साथ उकेरे वाली स्त्री रचनाकार के एगो रचना के हिन्दी अनुवाद उपमा ऋचा जी कइले बाड़ी, जेकर

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थेरी गाथा से कविता

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थेरीगाथा ( 600 ई.पू.) ह5 बौद्ध भिक्षुणियन के स्त्री स्वतंत्रता के पहिला घोषणापत्र । थेरी गाथा में प्रौढ़ भिक्षुणियन के आत्म व्यक्तव्य बा आ मेहरारूअन के रचित पहिला काव्य ह। एह में संकलित कवितन में भारत

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थेरी गाथा से कविता

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थेरी गाथा ( 600 ई.पू.) ह5 बौद्ध भिक्षुणियन के स्त्री स्वतंत्रता के पहिला घोषणापत्रा थेरी गाथा में प्रौढ़ भिक्षुणियन के आत्म व्यक्तव्य बा आ मेहरारूअन के रचित पहिला काव्य ह। एह में संकलित कवितन में भारत

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बिम्मी कुंवर भोजपुरी आ हिन्दी में लगातार आपन जोरदार उपस्थिति दर्ज कर रहल बाड़ी। साहित्य के अनेक विधन में उहां के लेखनी अपना उपस्थिति से ओह विधन के समृद्ध करत तेजी से बढ़ रहल बा उहां के हिन्दी कवितन के

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रेखा ड्रोलिया के कविता

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रेखा ड्रोलिया के स्त्री-विमर्श के एगो हिन्दी कविता के भोजपुरी अनुवाद | मूल : रेखा ड्रोलिया अनुवाद: कनक किशोर छुअन के चुभन ई छुअलो अलग अलग होला का इस्कूल में रही तब हमरा का पता कबो लइकाई में माईयो

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रूपज्योति सन्दिकोइ के कविता

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रूपज्योति सन्दिकोइ असमिया भाषा के एगो परिचित कवयित्री हुई। उहां के एगो कविता के भोजपुरी अनुवाद जेकर हिन्दी अनुवाद विष्णु कमल डेका कइले बानी। मूल रूपज्योति सन्धिकोइ अनुवाद: कनक किशोर दहन एकाएक एक दि

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अनुराधा सिंह के कविता

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अनुराधा सिंह हिन्दी कविता में सशक्त हस्ताक्षर बन के उभरल कवयित्री के नाम ह। वैश्विक सरोकार वाली विषयन पर तेजी से कलम चलावत आपन एगो अलग पहचान साहित्य के दुनिया में तेजी से बना रहल बाड़ी। तिब्बती कवितन प

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डॉ. सांत्वना श्रीकांत के कविता

15 November 2023
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डॉ. सांत्वना श्रीकांत अइसन रचनाकार हई जेकर कवितन में एक ओरि प्रेम के खोज रहेला तऽ दूसरा ओरि मेहरारूअन खातिर एगो नया दुनिया बसावे के सपना रहेला समय के साथ दउड़त आ संबंधन के लेके सजग सांत्वना के कवितन म

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लिली मित्रा के कविता

15 November 2023
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लिली मित्रा समय के साधके साहित्य सिरिजन करेवाली रचनाकार हुई। राउर समसामयिक विषयन पर रचल कवितन में पाठक के जोड़े के गजब ताकत रहेला जे पाटकन के भीतर झांकि के सोचे के मजबूर कर देला । लिली मित्रा के दूगो

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कनक किशोर के कविता

18 November 2023
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झारखंड वन सेवा के सेवानिवृत्त पदाधिकारी भोजपुरी आ हिन्दी लेखन कार्य में समान रूप से जुड़ाव अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मेलन, पटना के सदस्य। हिन्दी / भोजपुरी के आधा दर्जन पुस्तक प्रकाशित | जोहार भोज

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डॉ. उमाकांत वर्मा के कविता

18 November 2023
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डॉ. उमाकांत वर्मा के एगो नारीवादी रचना रचना स्रोत-पाती सितंबर 1993 अंका पता : हाजीपुर, वैशाली- 844101 अनचिन्हार जंगल के बीच से ससरत, काँपत टेरत हम डँडेर ही जे आँसू बोबाइल आँखि से हर पल दिसा हेरत रह

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डॉ. अक्षय पाण्डेय के कविता

18 November 2023
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डॉ. अक्षय पाण्डेय भोजपुरी नवगीत के क्षेत्र में आपन जोरदार उपस्थिति दर्ज कइले बानी नारी विमर्श पर उहां के दूगो कविता । पता: डॉ. अक्षय पाण्डेय प्रथम मकान, शिवपुरी कालोनी, प्रकाश नगर (फेमिली बाजार के नजद

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अवधेश कुमार चौधरी के गीत

18 November 2023
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पता: ग्राम-इंग्लिशपुर, पोस्ट-महुआर, जिला-भोजपुर ( बिहार ) कोखिए में मार देलू माई कइनी कवने हम कसुरवा कि कोखिए में मार देलू माई मार देलू माई कइनी कवने हम कसुरवा कि कोखिए में मार देलू माई दुनिया ना दे

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हरेराम त्रिपाठी 'चेतन' के कविता

18 November 2023
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अखिल भोजपुरी साहित्य सम्मेलन के वर्तमान अध्यक्ष भोजपुरी आ हिन्दी में लगातार लिख रहल बानी ना संस्कृत के अनुवाद पर इहां के काम मिल के पत्थर के रूप में स्थापित बा। संस्कार आ संस्कृति संरक्षण खातिर आजीवन

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डॉ. स्वर्ण लता के कविता

18 November 2023
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डॉ. स्वर्ण लता भोजपुरी बाल गीत पर शोध कइले बाड़ी। भोजपुरी कविता आ आलेख के रचना लगातार कर रहल बाड़ी उनकर कुछ कविता । पता कृष्णापुरी, चुटिया, राँची, झारखंड हाइकु नारी जीवन परजीवी सदा से ना केहू सुने। ब

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दिनेश पाण्डेय के कविता

18 November 2023
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दिनेश पाण्डेय के भोजपुरी कवितन के स्वाद अजगुत होला। छोट-छोट स्वातन के शब्दन में बाँधि के, पिरो के अइसे राखि देलन कि पाठकन के सोझा वड सामाजिक चित्रण सामने आ जाला । साहित्यिक दृष्टिकोण से उच्च कोटि के क

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एगो किताब पढ़ल जाला

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